पुलवामा हमले के बाद अक्षय कुमार ने पाकिस्तान का समर्थन किया? क्या है सच

अभिनेता अक्षय कुमार की एक वीडियो क्लिप काफी वायरल हो रही है, जिसमें वो कथित रूप से कह रहे हैं कि चरमपंथ पाकिस्तान में नहीं बल्कि भारत में है.

इस वीडियो के वायरल होने के बाद #BoycottAkshayKumar हैशटैग चलाया जा रहा है.

ट्वीटर पर कई लोग इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं और अक्षय कुमार को राष्ट्र विरोधी बता रहे हैं. वो लोगों से अक्षय कुमार का बहिष्कार करने की अपील भी कर रहे हैं.

इन ट्वीट्स में दावा किया जा रहा है कि कुमार ने कहा, "पाकिस्तान चरमपंथी देश नहीं है, बल्कि भारत में चरमपंथी तत्व हैं."

इस वायरल वीडियो में अक्षय कुमार कह रहे हैं कि "भारत में भी चरमपंथ है."

पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के "दुनिया न्यूज़" चैनल ने भी एक ऐसी ही स्टोरी छापी थी, जिसमें दावा किया गया था कि अक्षय कुमार ने चरमपंथी देशों में पाकिस्तान का नाम होने से इनकार किया है और कहा है कि चरमपंथ पूरी दुनिया में फैला है.

हमारी जांच में सामने आया कि इस वीडियो का पुलवामा हमले से कोई लेना-देना नहीं है.

वीडियो की सच्चाई
ये वीडियो 2015 का है. उस वक्त अक्षय कुमार अपनी फिल्म "बेबी" का प्रमोशन कर रहे थे. प्रमोशन के दौरान ही उन्होंने चरमपंथ के बारे में ये बयान दिया था.

असली वीडियो में अक्षय कुमार ने कहा है, "चरमपंथ किसी देश में नहीं होता. उसके कुछ एलिमेंट होते हैं. चरमपंथ भारत में भी है, अमरीका में भी और ऑस्ट्रेलिया, पेरिस और पेशावर में भी. चरमपंथ कुछ लोग फैलाते हैं और कोई भी देश उसका समर्थन नहीं करता."

फिलहाल अक्षय कुमार ने लोगों से अपील की है कि वो पुलवामा हमले में मारे गए सैनिकों के परिवार वालों के लिए राहत कोष "भारत के वीर" में योगदान दें.

कुमार ने इस फर्ज़ी वीडियो पर अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

यह फ़िल्म 'सारागढ़ी की लड़ाई' पर आधारित है. फिल्म का पोस्टर रिलीज़ करते हुए अक्षय ने लिखा कि ''इस पोस्टर को शेयर करते हुए मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है. साल 2018 की शुरुआत केसरी के साथ. मेरी अब तक की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म. मुझे आप सभी की शुभकामनाओं की हमेशा ज़रूरत रहेगी.''

फिल्म के पोस्टर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए फिल्म निर्माता करण जौहर ने ट्वीट किया और अक्षय को शुभकामना दी.

करण ने ट्वीट किया, ''केसरी को लेकर बहुत उत्साहित हूं....बहादुरी की अब तक की सबसे महान गाथा...हम आज से अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं. इस सफ़र में हमें आपकी दुआओं की ज़रूरत होगी.''

ये फ़िल्म सारागढ़ी की मशहूर जंग पर आधारित है.

सारागढ़ी की ये लड़ाई 19वीं सदी में 21 सिख सैनिकों (जो ब्रिटिश सेना में थे) और 10 हज़ार अफ़गानी कबालियों के बीच लड़ी गई थी. इसे सिखों द्वारा लड़े गए अब तक के सबसे महान युद्ध के तौर पर जाना जाता है.

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